नई दिल्ली : Supreme Court of India ने 1 मई को कांग्रेस नेता Pawan Khera को अग्रिम जमानत देते हुए Gauhati High Court की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के निष्कर्ष “गलत” प्रतीत होते हैं और प्रस्तुत सामग्री की सही समझ पर आधारित नहीं थे।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने टिप्पणी की कि मामले में लगाए गए आरोप और जवाबी आरोप पहली नजर में “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और आपसी दुश्मनी से प्रभावित लगते हैं, न कि ऐसे जिनमें हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता हो।
सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की अपील स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए। यह जमानत जांच अधिकारी द्वारा तय शर्तों के अधीन होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने गलत तरीके से आरोपी पर अतिरिक्त बोझ डाला और भारतीय न्याय संहिता के उन प्रावधानों पर अनावश्यक टिप्पणी की, जो एफआईआर का हिस्सा नहीं थे।
यह मामला असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sarma के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़ा है। असम पुलिस ने इस मामले में खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल को उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने, सबूतों से छेड़छाड़ न करने और सक्षम अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर न जाने का निर्देश दिया है। साथ ही बेंच ने स्पष्ट किया कि उसकी यह टिप्पणी केवल जमानत याचिका तक सीमित है और इससे जांच या ट्रायल की प्रक्रिया के मेरिट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।